Jabalpur News: श्रमसाध्य भत्ता वितरण की जांच तेज, लोकायुक्त पुलिस ने RDVV प्रशासन को तलब किया
आर्य समय संवाददाता, जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (RDVV) में कर्मचारियों को दिए गए श्रमसाध्य भत्ते के वितरण में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर लोकायुक्त पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। शिकायत के आधार पर लोकायुक्त पुलिस जबलपुर ने विश्वविद्यालय प्रशासन से संबंधित दस्तावेज तलब करते हुए अधिकारियों को तलब किया है।
लोकायुक्त कार्यालय से जारी पत्र के अनुसार, प्रकरण क्रमांक 252/ई/2025 के तहत यह जांच की जा रही है। जांच में यह सामने आया है कि तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को श्रमसाध्य भत्ता दिए जाने की प्रक्रिया में शासन एवं विश्वविद्यालय समन्वय समिति के निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
लोकायुक्त पुलिस ने विश्वविद्यालय से यह स्पष्ट करने को कहा है कि भत्ता किन आदेशों के तहत स्वीकृत किया गया, किन कर्मचारियों को, किस अवधि में और कितनी राशि का भुगतान हुआ, तथा अतिरिक्त कार्य (ओवरटाइम) से संबंधित सत्यापित पंजी/रजिस्टर प्रस्तुत किए जाएं।
जांच एजेंसी ने यह भी निर्देश दिए हैं कि श्रमसाध्य भत्ते से संबंधित संपूर्ण प्रक्रिया से जुड़े विभाग/स्थापना/लेखाशाखा के जिम्मेदार अधिकारियों को 12/01/2026 को आवश्यक दस्तावेजों सहित उपस्थित कराया जाए। लोकायुक्त ने मामले को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के संकेत दिए हैं।
क्या है मामला- लोकायुक्त कार्यालय में प्रस्तुत शिकायत के अनुसार रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर में कर्मचारियों को दिए गए श्रमसाध्य भत्ते के वितरण में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा शासन के निर्देशों और निर्धारित नियमों की अनदेखी करते हुए जनवरी 2024 से अक्टूबर 2024 (एवं आगे की अवधि) तक कर्मचारियों को बिना वास्तविक अतिरिक्त कार्य कराए ही श्रमसाध्य भत्ता वितरित किया गया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि इस प्रक्रिया में न तो अतिरिक्त कार्य का समुचित रिकॉर्ड (रजिस्टर/पंजी) संधारित किया गया और न ही पात्रता की जांच की गई, जिससे विश्वविद्यालय को लाखों–करोड़ों रुपये की वित्तीय क्षति पहुंची। मामले को गंभीर मानते हुए लोकायुक्त पुलिस ने जांच प्रारंभ कर विश्वविद्यालय प्रशासन से संबंधित आदेश, भुगतान विवरण और उपस्थिति/अतिरिक्त कार्य से जुड़े दस्तावेज तलब किए हैं।
समन्वय समिति का निर्णय विश्वविद्यालय समन्वय समिति की 101वीं बैठक (दिनांक 31 जनवरी 2024) में यह स्पष्ट निर्णय लिया गया था कि श्रमसाध्य भत्ता केवल उन्हीं कर्मचारियों को दिया जाएगा जो कार्यालयीन समय के अतिरिक्त (प्रातः 10 बजे से सायं 5:30 बजे के बाद) परीक्षा, गोपनीय या अन्य अनिवार्य अतिरिक्त कार्य करेंगे। इसके लिए पृथक पंजी संधारित करना अनिवार्य किया गया था, जिसमें अतिरिक्त कार्य के घंटों का स्पष्ट विवरण दर्ज हो एवं विभाग प्रमुख द्वारा प्रमाणित की गई हो।
साथ ही यह भी तय किया गया था कि तृतीय श्रेणी कर्मचारियों को अधिकतम ₹30,000 और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को अधिकतम ₹25,000 वार्षिक सीमा के भीतर ही, अनुपातिक आधार पर भुगतान किया जाएगा। शिकायत का आरोप है कि इन स्पष्ट निर्देशों के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियमों की अवहेलना कर मनमाने ढंग से अधिकतम सीमा का भुगतान किया, जो जांच का मुख्य विषय है। लोकायुक्त पुलिस की इस कार्रवाई से विश्वविद्यालय प्रशासन में हलचल मची हुई है। आने वाले दिनों में दस्तावेजों की जांच के बाद जिम्मेदारी तय होने की संभावना जताई जा रही है।