Jabalpur News: जबलपुर की संजीवनी क्लीनिक में पदस्थ डॉक्टर निकला फर्जी, दमोह में पड़े गए फर्जी डॉक्टरों ने खोला राज, विभाग में हड़कंप

Jabalpur News: जबलपुर की संजीवनी क्लीनिक में पदस्थ डॉक्टर निकला फर्जी, दमोह में पड़े गए फर्जी डॉक्टरों ने खोला राज, विभाग में हड़कंप

आर्य समय संवाददाता,जबलपुर। शहर में स्थित संजीवनी क्लीनिकों के नाम पर हुई खरीदियों में भ्रष्टाचार की अभी जांच चल रही रही है कि एक नया खुलासा हुआ है। संजीवनी क्लीनिक में कई माहों से सेवाएं दे रहा चिकित्सक भी फर्जी निकला हैं। पूरे फर्जीवाडे़ की परर्ते पुलिस में जांच में खुली,जिसके बाद जबलपुर से फर्जी डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया गया है। पिछले कुछ माहों से जिस तरह से स्वास्थ्य विभाग के घोटाले सामने आ रहे हैं,उनसे साफ है कि विभाग के अधिकारी आमजनों की जान खतरे में डाल पैसे कमाने में जुटे हैं।

जानकारी के मुताबिक जबलपुर की चेरीताल संजीवनी क्लीनिक में पदस्थ डॉ. अजय मौर्य को डिग्री फर्जी मामले में गिरफ्तार किया गया है। डॉ. मौर्य चेरीताल संजीवनी क्लीनिक में करीब डेढ़ साल से पदस्थ थे। इस फर्जीवाडे़ की परर्ते जब खुली जब दमोह में पदस्थ दो डॉक्टरों की डिग्री पर संदेह होने पर सीएमएचओ कार्यालय ने पुलिस को प्रकरण जांच के लिए सौंपा। जांच में पता चला कि उक्त चिकित्सकों भर्ती के समय एमबीबीएस की फर्जी डिग्री,मेडिकल काउंसिल का रजिस्ट्रेशन नंबर और अन्य दस्तावेज जाली जमा किए थे।

कड़ाई से पूछताछ में उक्त दोनों आरोपितों ने जबलपुर में पदस्थ डॉ. अजय मौर्य के नाम का खुलासा कर दिया। आरोपियों ने यह भी पुलिस को बताया कि अजय के माध्यम से उन्होंने डिग्री हासिल की थी। दमोह पुलिस ने इस अंतरराज्यीय गैंग की जब परर्ते उधेड़ी तो पता चला कि उक्त फर्जी डॉक्टरों की नजरें प्रदेश में खुल रही संजीवनी क्लीनिकों पर थीं। वे जुगाड़ लगाकर केवल संजीवनी क्लीनिकों में ही पदस्थ हो रहे थे। स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड के हिसाब से जबलपुर के चेरीताल संजीवनी क्लीनिक में सेवाएं दे रहा डॉ. अजय मौर्य मुलता: मुरैना निवासी है। जिससे अब पुलिस पूछताछ कर रही हैं। 

अक्सर तीर्थ दर्शन स्पेशल ट्रेनों लगती थी ड्यूटी -- दमोह पुलिस द्वारा संजीवनी क्लिनिक में पदस्थ फर्जी डिग्रीधारी डॉक्टरों के अंतरराज्यीय गिरोह का पदार्फाश किए जाने के बाद अब जबलपुर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। चेरीताल (जबलपुर) संजीवनी क्लिनिक से गिरफ्तार फर्जी डॉक्टर अजय मौर्य के मामले में अब विभाग के एपीएम संदीप नामदेव और अर्बन नोडल अधिकारी डॉ.अमजद खान की भूमिका की जांच कर सकता हैं।

विभागीय सूत्रों और स्थानीय शिकायतों के अनुसार, आरोपी अजय मौर्य बिना डिग्री के मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहा था। वह कभी क्लिनिक नहीं आता था, आरोप है कि एपीएम संदीप नामदेव और नोडल अधिकारी डॉ. अमजद खान से सेटिंग कर केवल तीर्थ दर्शन यात्रा जैसी स्पेशल ट्रेनों में वीआईपी ड्यूटी करता था। 

वेतन निर्धारण कैसे हो रहा था- विभागीय सूत्र बताते हैं कि भले ही चिकित्सकों की भर्ती मुख्यालय स्तर पर हुई हो, लेकिन ज्वाइनिंग के दौरान उनके दस्तावेजों की जांच स्थानीय स्तर पर कराए जाते हैं। इसके बाद ही वेतन निर्धारण होता है व भुगतान होता है। इतना ही नहीं शासन के सार्थक एप में उपस्थिति दर्ज करानी होती है। उपस्थिति पंजीयक की जांच कर उसे भुगतान के लिए भी स्थानीय अधिकारी ही आगे बढ़ाते हैं।

अर्बन नोडल अधिकारी डॉ.अमजद खान ने बताया कि संजीवनी क्लीनिकों के लिए चिकित्सकों की भर्ती मुख्यालय स्तर पर ही होती है, दस्तावेजों के वेरिफिकेशन से लेकर हर जांच मुख्यालय करता है। स्थानीय स्तर से केवल रिक्त स्थानों की सूची भेजी जाती है। भोपाल से ज्वाइनिंग लेटर लेकर चिकित्सक आते हैं।

एपीएम संदीप नामदेव ने बताया कि चेरीताल स्थित संजीवनी क्लीनिक में पदस्थ रहे डॉ. अजय मौर्य को दमोह पुलिस ने गिरफ्तार किया है, पुलिस के मुताबिक डॉ. अजय मौर्य की डिग्री फर्जी पायी गई है। इस मामले में राज्य स्तरीय चांच चल रही है।