Jabalpur News: कुल शरीफ में मांगी गई अमन-चैन की दुआएं,उर्स शरीफ का हुआ समापन
आर्य समय संवाददाता,जबलपुर। हाईकोर्ट के सामने स्थित हज़रत ख्वाजा अमीनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह कचहरी वाले बाबा साहब के पांच दिवसीय उर्स शरीफ का समापन कुल शरीफ के साथ अकीदत व एहतराम के माहौल में हुआ। उर्स के अंतिम दिन दोपहर 3 बजे आयोजित कुल शरीफ में महफिल-ए-सिमा का एहतमाम किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की।
महफिल-ए-सिमा की सदारत बाबर खां बंदानवाजी एवं खादिम-ए-आला चंगेज़ खान अशरफी ने फरमाई। दरबारी कव्वालों ने महफिल का आगाज़ क़ौल से किया। इसके बाद मशहूर सूफी शायर हज़रत बेदम वारसी की मशहूर नात “आई नसीम-ए-कू-ए-मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम” पेश की गई, जिसे सुनकर समाईन झूम उठे और खूब दाद पेश की।
महफिल में ताजुद्दीन बाबा नागपुर के खादिम मोहम्मद नियाज़ ताज़ी, शफीपुर शरीफ के कमरुद्दीन खलीली , सूफी मेराज बाबा जमाली, खादिम बाबा जमाली, हकीम बाबा, सूफ़ी नईम शाह, आफताब कादरी, सुनील चौकसे,प्रदीप तिवारी, मनीष अग्रवाल, प्रीतम केवट,कांतिलाल गुप्ता,गौरीशंकर,नरेश मलिक, अजय गायकवाड़,दीपचंद रजक वंस खानेजा,अर्जुन चौधरी, घनश्याम कश्यप सहित अनेक अकीदतमंद मौजूद रहे।
महफिल के आखिर में हज़रत अमीर खुसरो का मशहूर कलाम “आज रंग है ऐ माँ रंग है री, मेरे महबूब के घर रंग है” पढ़ा गया, जिसने पूरे माहौल को सूफियाना रंग में रंग दिया। महफिल-ए-सिमा के पश्चात बाबर खां बंदानवाजी ने मुल्क में अमन, भाईचारे और खुशहाली के लिए खास दुआएं कीं।
कुल शरीफ की न्याज़ के बाद अकीदतमंदों में लंगर तकसीम किया गया। खादिम-ए-आला चंगेज़ खान अशरफी ने उर्स शरीफ में दूर-दराज़ से पहुंचे जायरीनों और अकीदतमंदों का शुक्रिया अदा करते हुए जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, नगर निगम एवं प्रेस मीडिया के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
अल सुबह तक चली कव्वाली की महफिल- उर्स शरीफ की गत रात्रि आयोजित कव्वाली महफिल में फनकार नुसरत कादरी ने अपने सूफियाना कलाम से समां बांध दिया। कव्वाली का आगाज़ हम्द-ए-पाक और नात-ए-पाक से किया गया। इसके बाद समाईन की फरमाइश पर उन्होंने “ख्वाजा गरीब नवाज़ की मनकबत — उनके हाथों में है मेरी शर्मो-हया, मेरा लाजपाल है मेरा ख्वाजा पिया” पेश की, जिस पर अकीदतमंदों ने दिल खोलकर नज़राना पेश किया। कव्वाली महफिल में हिंदू-मुस्लिम धर्मावलंबियों के साथ जनप्रतिनिधियों ने भी शिरकत कर दरगाह में हाज़री दी। अल सुबह तक चली इस रूहानी महफिल का समापन सलातो-सलाम के साथ हुआ।