Jabalpur Cantt News: कैंट के नेताओं को फिर रक्षा मंत्रालय ने दिखाया ठेंगा, बोर्ड के लिए नामांकित मेंबर्स की सूची जारी, जबलपुर का हाथ खाली

Jabalpur Cantt News: कैंट के नेताओं को फिर रक्षा मंत्रालय ने दिखाया ठेंगा, बोर्ड के लिए नामांकित मेंबर्स की सूची जारी, जबलपुर का हाथ खाली

आर्य समय संवाददाता,जबलपुर। एक बार फिर रक्षा मंत्रालय ने जबलपुर कैंट बोर्ड की राजनीति में सक्रिय रहने वाले नेताओं को ठेंगा दिखा दिया है। दरअसल, गत दिवस रक्षा मंत्रालय द्वारा कैंट बोर्ड के लिए नामांकित मेंबर्स की सूची जारी की गई। लेकिन इस सूची में जबलपुर कैंट बोर्ड के सामने ‘रिक्त’ लिखा हुआ है। बात साफ है कि जबलपुर कैंट में रहने वाली सिविल आबादी की आवाज उठाने के लिए नामांकित मेंबर तक नाम तय नहीं हो पा रहा है।

दरअसल, बीते पांच सालों से कैंट बोर्ड में निर्वाचित मेंबर्स की कुर्सी खाली है। रक्षा मंत्रालय ने कैंट बोर्ड के सिविल एरिया को समीपस्थ निकायों में विलय करने के नाम पर मेबर्स का चुनाव बंद कर दिया है। निर्वाचित मेंबर्स की कमी अब सिविल एरिया के रहवासियों को खलने लगी है। चाहे टैक्स संबंधी समस्या हो या फिर बाजार की दुकानों के रेंट का मामला हो। प्रतिनिधि नहीं होने के कारण आम आदमी की आवाज अधिकारियों तक पहुंच ही नही पा रही है।

जानकारी के मुताबिक 19 जनवरी को रक्षा मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी की गई है। जिसमें उल्लेखित है कि कतिपय छावनी परिषदों (कैंट बोर्ड) में फेरफार की घोषणा अंतर्विष्ट थी के साथ पठित छावनी अधिनियम, 2006 (2006 का 41) की धारा 13 की उप-धारा (3) के अनुसरण में करते हुए नामांकित सदस्यों को नियुक्ति किया जाता है। सूची के मुताबिक देश के 56 कैंट बोर्ड में से 47 में नामांकित मेंबर्स तैनात कर दिए हैं। इनमें से ज्यादात्तर पहले से ही नियुक्ति थे। लिहाजा उनके कार्यकाल को एक साल के लिए बढ़ा दिया गया है। वहीं देश के 9 कैंट बोर्ड जिसमें जबलपुर भी शामिल है उन्हें रिक्त छोड़ दिया गया है।

विधायक को करना पड़ता है धरना-प्रदर्शन -  कैंट बोर्ड में निर्वाचित मेंबर्स नही होने का ही परिणाम है कि क्षेत्र की छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर विधायक को धरना-प्रदर्शन करना पड़ता है। वर्तमान में संपत्ति कर को लेकर काफी शिकायतें सामने आ रही थीं, हालांकी उन्हें सुरझाने के लिए कैंट बोर्ड ने कैंप लगाए। लेकिन ज्यादात्तर मामलों में समाधान नही हो सका। क्योंकि बोर्ड में एक बार कोई प्रस्ताव पास हो जाने के बाद उसे बदने में काफी तकनीकी अड़चने होती है।