कमलनाथ फिर क्यों पावर में, जानिए क्या है सक्रियता के मायने

कमलनाथ फिर क्यों पावर में, जानिए क्या है  सक्रियता के मायने

पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे कमलनाथ एक बार फिर जोरशोर से मप्र में सक्रिय हो गए हैं। उनकी सक्रियता को कांग्रेस तो ठीक, भाजपा में भी बड़ी हैरतभरी निगाहों से देखा जा रहा है। नाथ का छिंदवाड़ा में विधानसभावार बैठकें लेना और फिर बागेश्वरधाम सरकार जाना उनके नए दौर का आगाज माना जा रहा है। 

सक्रियता के क्या मायने?

नाथ को लेकर कहा जा रहा था कि उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बुलाया है और वे कांग्रेस के कोषाध्यक्ष बनाए जा सकते हैं। पेशे से उद्योगपति कमलनाथ इस पद के लिए सबसे उपयुक्त थे और गांधी परिवार के भरोसेमंद भी, लेकिन कहा जा रहा है कि नाथ की पटरी राहुल गांधी से उतनी अच्छी नहीं बैठती, इसलिए न केवल उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से बिना सूचना हटाया गया, बल्कि अब कोषाध्यक्ष भी नहीं बनाया गया। नाथ करीब 20 दिनों तक दिल्ली में सक्रिय रहे और कोशिश करते रहे कि कोई राष्ट्रीय पद मिल जाए। उन्हें महाराष्ट्र का प्रभारी बनाने की खबर थी, क्योंकि वहां इसी वर्ष के अंत में चुनाव है। 

बागेश्वरधाम पहुंचे नाथ

नाथ छिंदवाड़ा दौरे के बाद छतरपुर पहुंचे और बाबा बागेश्वरधाम पहुंचकर आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से मिले। उनकी इस मुलाकात पर कांग्रेस के साथ भाजपा नेता भी हैरत में हैं। कहा जा रहा है कि पार्टी की हिदूं विरोधी बनती छवि को तोडने का प्रयास है। वैसे, कमलनाथ जब मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने हनुमान जयंती भी धूमधाम से मनाई थी। उन्होंने राम वनगमन पथ के लिए राशि भी मंजूर की थी। पार्टी में एक ओर दिग्विजय सिंह जहां हिंदू विरोधी छवि के साथ चल रहे हैं तो नाथ ने हिदूं छवि अपना ली है।

पटवारी नहीं दे रहे भाव!

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के बारे में कहा जा रहा है कि वे नाथ को कोई भाव नहीं दे रहे। वे उनसे कोई राय-मशविरा भी नहीं करते और न ही किसी कार्यक्रम का न्योता भेजा जाता है। यहां तक कि छिंदवाड़ा के अमरवाड़ा विधानसभा उपचुनाव में पटवारी ने खुद श्रेय लेने के चक्कर में उन्हें दरकिनार किया, जबकि वो उनका ही जिला है। दिल्ली से निराश होने के बाद अब नाथ प्रदेश में ही अपनी जगह खुद तलाश रहे हैं। भोपाल में अपने समर्थकों से मुलाकात कर रहे हैं।