Jabalpur News: गुड़हाई में चल रही भागवत कथा के अंतिम दिन बताया गया दीनता का मतलब

Jabalpur News: गुड़हाई में चल रही भागवत कथा के अंतिम दिन बताया गया दीनता का मतलब

आर्य समय संवाददाता,जबलपुर। बड़े भाग्य से मानव तन मिलने के बाद भी जो मानव राम रतन धन के लिए लालायित न हो, वो संसार का सबसे बड़ा गरीब है। भक्त को भगवान से यही कहना चाहिए कि प्रभु मुझे आपके अलावा कुछ नहीं चाहिए। आप ही हमारा धन हो। इस आशय के उद्गार पं. राकेश पाठक शरणागत ने गुड़हाई में चल रही श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के समापन दिवस पर सुदामा चरित्र की व्याख्या करते हुए व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि गरीबी अपने आप में अभिशप्त है, पर सबसे बड़ा गरीब वही है जिसे राम नामक रतन धन का पता न हो। संसारी संपत्ति भौतिक संपत्ति हो सकती है, पर वो दैवीय संपत्ति नहीं हो सकती। सुदामा गरीब था, लेकिन जब उसने भगवान श्री कृष्ण चंद्र को अपना मूल धन माना तो उसके पास दुनिया का वैभव भी हा गया। सुदामा चरित्र चरित्र के साथ ही उन्होंने परीक्षित मोक्ष की कथा सुनाई।

उन्होंने बताया कि कैसे प्रभु अपने सखा सुदामा के प्रेम के आगे नतमस्तक हो जाते हैं और बिना मांगे ही उन्हें सब कुछ प्रदान कर देते हैं। श्री पाठक द्वारा पिछले 7 दिनों में सुनाई गई कथा में जिंदगी जीने की कला, भक्ति का महत्व और सत्संग की सीख का वर्णन किया। श्री पाठक ने सातों दिन भगवान की कथा सुनाकर सुधि रसिक कथा प्रेमियों को भाव विभोर कर दिया। कथा के अंतिम दिन उन्होंने सातों दिन की कथा का सारांश किया।

उन्होंने मानव जन्म मिलने पर कैसे जीना है, ये बताया। उनका कहना था कि मनुष्य का जीवन कई योनियों के बाद मिलता है। मानव जन्म भगवान का उपहार है। उन्होंने सूर्यदेव से उपहार स्वरूप मिली स्यामंतक मणि का प्रसंग सुनाते हुए मणि के खो जाने पर जामवंत और श्रीकृष्ण के बीच 28 दिन तक चले युद्ध और फिर जामवंती, सत्यभामा समेत से श्रीकृष्ण सभी आठ विवाह की कथा सुनाई।

उन्होंने बताया कि कैसे प्रभु ने दुष्ट भौमासुर के पास बंदी बनी हुई 16 हजार 100 कन्याओं को मुक्त करवाया और उन्हें अपनी पटरानी बनाकर उन्हें मुक्ति दी। उन्होंने सुदामा चरित्र को विस्तार से सुनाया। कृष्ण और सुदामा की निष्छल मित्रता का वर्णन करते हुए श्री पाठक ने बताया कि कैसे बिना याचना के कृष्ण ने गरीब सुदामा का उद्धार किया।

मित्रता निभाते हुए सुदामा की स्थिति को सुधारा। महाराजश्री ने गौ वध का विरोध और गौ सेवा करने पर भी जोर दिया। अंत में यजमान राजेश-प्रभा पाठक, मुकेश-रानू पाठक, रमाकांत दुबे, अंकुर पाठक ने पोथी पूजन कर आरती वंदन की। आयोजक परिवार ने कथा सुनने आये सभी श्रद्धालुओं का आभार जताया।