Jabalpur News: फर्जी किसानों की फौज खड़ी कर शासन को लगाया चूना, बेगमगंज सीड के डायरेक्टर्स सहित अन्य पर एफआईआर दर्ज

Jabalpur News: फर्जी किसानों की फौज खड़ी कर शासन को लगाया चूना, बेगमगंज सीड  के डायरेक्टर्स सहित अन्य पर एफआईआर दर्ज

आर्य समय संवाददाता,जबलपुर। जिले में बेगमगंज सीड प्रोड्यूसर लिमिटेड कंपनी द्वारा अंजाम दिए गए इस सुनियोजित वित्तीय फर्जीवाड़े में कलेक्टर जबलपुर राघवेन्द्र सिंह की मंजूरी के बाद कुल 9 लोगों पर नामजद मुकदमा कायम किया गया है। आरोपियों में कंपनी के 6 डायरेक्टर सचिन दुबे, रंजना पाण्डे, संदीप दुबे, अंशुल बर्मन, नेहा पाण्डे, उमा सिंह और 3 वेतनभोगी कर्मचारी प्रबंधक मनीष चौरसिया, लेखापाल कमलेश साहू तथा कंप्यूटर ऑपरेटर नीलेश विश्वकर्मा शामिल हैं।

दरअसल,किसान मजदूर महासंघ के जिला अध्यक्ष राजेंद्र सिंह ठाकुर की शुरुआती शिकायत पर बैठी उच्च स्तरीय जांच में यह साबित हुआ है कि इन सभी लोगों ने मिलकर जाली बैंक खाते और फर्जी किसानों की फौज खड़ी कर शासन को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया।

जिसके बाद किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के सहायक संचालक रवि कुमार आम्रवंशी की लिखित शिकायत पर पाटन पुलिस ने इस पूरे मामले में आईपीसी की धारा 420, 467, 34 के तहत केस दर्ज कर इसकी विस्तृत कमान थाना निरीक्षक गोपीन्द्र सिंह राजपूत को सौंप दी है। ​ ​

जांच टीम के हाथ लगे दस्तावेजों से साफ हुआ है कि बेगमगंज सीड प्रोड्यूसर लिमिटेड कंपनी के कर्ताधर्ताओं ने कागजों पर ही पूरा मायाजाल बुन रखा था। कंपनी के आधिकारिक रिकॉर्ड में किसी भी तरह की बैठक, एजेंडा या निर्णय के बिना ही सीधे प्रबंधक मनीष चौरसिया, कंप्यूटर ऑपरेटर नीलेश विश्वकर्मा और लेखापाल कमलेश साहू के नियुक्ति आदेश जारी कर दिए गए।

हैरानी की बात यह है कि इन नियुक्ति पत्रों पर कोई तारीख तक दर्ज नहीं थी और अलग-अलग कागजातों पर किए गए हस्ताक्षर भी आपस में मेल नहीं खा रहे थे। जांच दल ने इन सभी पत्रों को पूरी तरह जाली और नियम विरुद्ध करार दिया है। ​ ​सरकारी नियमानुसार अनाज उपार्जन का काम पाने के लिए किसी भी समिति या कंपनी के पास 50 लाख रुपये की नकद राशि या क्रेडिट लिमिट होना अनिवार्य शर्त है।

इस तकनीकी पात्रता को धोखे से हासिल करने के लिए कंपनी ने आईसीआईसीआई बैंक का खाता संख्या 734505500175 दस्तावेजों में दर्शाया था। जब जांच दल ने संबंधित बैंक से इसका सत्यापन कराया, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि यह खाता बेगमगंज सीड प्रोड्यूसर लिमिटेड कंपनी का था ही नहीं। इसके साथ ही जमा की गई किसान सूची में भी सदस्यों के पते और शेयर का कोई विवरण मौजूद नहीं था। ​