Jabalpur News: करौंदी के सीमांकन से हड़कंप, DEO से मिले पूर्व बोर्ड मेंबर यादव, सौंपें दस्तावेज

Jabalpur News: करौंदी के सीमांकन से हड़कंप, DEO से मिले पूर्व बोर्ड मेंबर यादव, सौंपें दस्तावेज

आर्य समय संवाददाता, जबलपुर। रक्षा मंत्रालय से मिले निर्देशों के बाद डिफेंस ईस्टेट ऑफिस (डीईओ) द्वारा जमीनों का सीमांकन किया जा रहा है। वहीं रक्षा मंत्रालय की भूमि पर किए गए अतिक्रमण को चिहिंत किया जा रहा है। इस सर्वे से सबसे ज्यादा करौंदी बस्ती और बगीचा क्षेत्र में रहने वालों में दहशत का माहौल बना हुआ है।

दरअसल, सेंट्रल ऑर्डिनेंस डिपो (सीओडी) से लगी हुई करौंदी बस्ती का बीते एक पखवाड़े से सर्वे किया जा रहा है। पहली बार सर्वे में किस जगह पर किस व्यक्ति ने निर्माण कर रखा है। इसका डाटा भी तैयार किया जा रहा है। इस बीच यह चर्चा निकल पड़ी है कि सर्वे पूरा होने के बाद अतिक्रमणों पर बुल्डोजर चलेंगे। बस इसी बात से लोगों में दहशत बनी हुई है। 

इस बीच कैंट बोर्ड के पूर्व मेंबर राजीत यादव ने डिफेंस ईस्टेट ऑफिसर (डीईओ) नेहा गुप्ता से मुलाकात कर उन्हे बताया कि सीओडी की स्थापना के दौरान विस्थापित किए गए किसानों व परिवारों को करौंदी में बसाया गया था। वहीं करौंदी को सिविल एरिया में शामिल किए जाने की प्रक्रिया भी प्रारंभ हो गई थी।

इसका प्रमाण एमईओ अर्थात मिलिट्री स्टेट ऑफिसर जेए मानवलन द्वारा हस्ताक्षरित टाइटल प्रिपरेशन का जीएलआर प्लान ऑफ करौंदी गांव जबलपुर के नाम से डिप्टी डायरेक्टर मिलिट्री लैंड एंड कैंटोनमेंट हैडक्वाटर सादर्न कमांड पुणे को लिखा गया पत्र है। बीईओ कायपालि विस्थापन से जुड़े दस्तावेजों को जिसकी छाया प्रति भी उपलब्ध है। 

दूसरा प्रमाण स्थानीय सैन्य हेडक्वार्टर मध्य प्रदेश सब एरिया का 5 अप्रैल 1963 का टाइटल करौंदी गांव जबलपुर कैंटोनमेंट प्रिपरेशन ऑफ जीएलआर एंड प्लान के अंतर्गत मिलिट्री स्टेट ऑफिसर को दी गई एनओसी है। जिसमें उनके द्वारा स्वयं लिखा गया है की सेना के दृष्टिकोण से यदि जबलपुर कैंटोनमेंट बोर्ड द्वारा करौंदी क्षेत्र को सिविल क्षेत्र घोषित किया जाता है तो सैन्य प्रशासन को कोई आपत्ति नहीं है।

पूर्व मेंबर ने बताया कि इस बात के भी प्रमाण है कि भारत सरकार द्वारा वर्ष 1937 में आर्सेनल से 134 परिवारों को 9 एक-ड़ 55 डिसमिल भूमि करौंदी में प्रदान की गई थी। जिसे कैंट बोर्ड द्वारा शुव्यवस्थित कर रोड नाली, पानी, प्रकाश संपूर्ण व्यवस्थाओं के साथ 134 परिवारों को बसाया गया था। उक्त भूमि को वर्तमान भू-स्वामी से 1850 रुपए में भारत सरकार द्वारा क्रय कर करौंदी क्षेत्र में 134 परिवारों को बसाया गया।