Jabalpur News: RDVV हंगामे के बीच बजट पारित, कार्यप्रणाली पर तीखा असंतोष; 27 अप्रैल को होगी समीक्षा बैठक

Jabalpur News: RDVV हंगामे के बीच बजट पारित, कार्यप्रणाली पर तीखा असंतोष; 27 अप्रैल को होगी समीक्षा बैठक

आर्य समय संवाददाता,जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय ( RDVV ) में सोमवार 30 मार्च को सभा (कोर्ट) एवं कार्यपरिषद् की बैठकों में बजट 2026-27 प्रस्तुत किया गया। बैठक के आरंभ में कुलगुरु प्रो. राजेश कुमार वर्मा ने विधायकों लखन घनघोरिया, ओमप्रकाश धुर्वे, अशोक रोहाणी, प्रणय प्रभात पाण्डेय, ओमकार सिंह मरकाम एवं महापौर जगत बहादुर सिंह का स्वागत किया। प्रभारी कुलसचिव प्रो. सुरेन्द्र सिंह ने कार्यपरिषद् सदस्यों एवं संकायाध्यक्षों का स्वागत किया एवं वित्त नियंत्रक सुरेश कतिया ने विश्वविद्यालय का वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया।

इधर, बताया जाता है कि सभा (कोर्ट) की बैठक में एक फिर आरोप-प्रत्यारोप और तीखी बहस हुई, जिसमें विश्वविद्यालय का वार्षिक बजट पारित तो हो गया। लेकिन प्रशासन की कार्यप्रणाली पर जनप्रतिनिधियों ने गंभीर असंतोष व्यक्त किया। बैठक में सत्ता और विपक्ष दोनों पक्षों के जनप्रतिनिधियों ने एक स्वर में विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली, वित्तीय प्रबंधन और छात्र-सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए।

बैठक के दौरान सदस्यों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए पूछा कि पिछले वित्तीय वर्ष में आवंटित बजट का समुचित उपयोग क्यों नहीं किया गया। कुछ राशि के लैप्स होने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा, जिसे प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण बताया गया। जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि प्रशासन अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध खुलकर विरोध किया जाएगा।

उन्होंने विभिन्न विभागों से संबंधित पालन प्रतिवेदन एवं प्रगति रिपोर्ट आगामी 27 अप्रैल को आयोजित होने वाली विशेष समीक्षा बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इस बैठक में सभी लंबित मुद्दों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। बैठक में कर्मचारियों और अधिकारियों के पेंशन प्रकरणों में देरी, बाहरी भुगतान लंबित रहने और इसके कारण न्यायालय में याचिकाओं के बढ़ते मामलों पर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई।

सदस्यों ने कहा कि इन कारणों से विश्वविद्यालय की साख को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। प्रशासन से इन प्रकरणों पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई कर संतोषजनक समाधान प्रस्तुत करने को कहा गया है। इस दौरान नवनिर्वाचित कर्मचारी संघ अध्यक्ष संजय यादव भी बैठक में पहुंचे और उन्होंने कर्मचारियों की लंबित मांगों को प्रमुखता से उठाते हुए सदस्यों के समक्ष अपनी बात रखी।

इसके अतिरिक्त, पिछले तीन वर्षों से दीक्षांत समारोह आयोजित न होने और मेधावी छात्रों को पदक वितरित न किए जाने पर भी नाराजगी जाहिर की गई। साथ ही, उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन करने वाले शिक्षकों के लंबित भुगतान पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे शीघ्र निपटाने की मांग की गई। जनप्रतिनिधियों ने कुलगुरु को सुझाव दिया कि वे विश्वविद्यालय के सभी घटकों शिक्षकों, कर्मचारियों और अधिकारियों को साथ लेकर कार्य करें तथा छात्रों की समस्याओं का प्रभावी समाधान सुनिश्चित करें।

उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 की धारा 19(1) के अनुसार विश्वविद्यालय की सभा (कोर्ट) उसकी सर्वोच्च प्राधिकारी संस्था होती है, जबकि धारा 22(3) एवं (4) के तहत वार्षिक प्राक्कलन एवं वित्तीय प्रतिवेदन को अनुमोदित करना इसी संस्था का दायित्व है। ऐसे में इस बैठक में उठे गंभीर प्रश्न विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए चेतावनी के रूप में देखे जा रहे हैं। 

बजट में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय -

1.वित्तीय वर्ष 2025-26 में 14.95 करोड़ की बचत के साथ विश्वविद्यालय वित्तीय आधार पर सुदृढ़ स्थिति में है। वित्तीय वर्ष 2026-27 का 20.98 करोड़ के घाटे का बजट पेश किया गया ।

2.कृषि विभाग के लिए अनुमानित 6 करोड़ की लागत का तीन मंजिला भवन के प्रस्ताव को मान्य किया गया।

3.नर्सिंग पेरामेडिकल के तीन मंजिला नये भवन के अनुमानित 6 करोड़ के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

4.कर्मचारियों के आवासों पर बार-बार रिनोवेशन पर अधिक व्यय करने के स्थान पर चार मंजिला आवासीय भवन लिफ्ट के साथ जिसमें 40 आवास प्रस्तावित हैं एवं अनुमानित लागत 6 करोड़ के प्रस्ताव को मान्य किया गया। साथ ही 2 करोड़ विभिन्न अन्य रिनोवेशन कार्य के लिए स्वीकृत किया गया है।

5.विश्वविद्यालय के मूल्यांकन की व्यवस्था के लिए डिजिटल मूल्यांकन एवं डिजीटाइजेशन के प्रस्ताव हेतु 2 करोड़ की स्वीकृति दी गई है।

6.ई-ऑफिस के लिए सुझाव प्राप्त हुआ। जिस पर शीघ्र ही प्रशासनिक तैयारी की जा रही है। ई-गवर्नेन्स के लिए प्रशासन को सभी व्यवस्थाएं पूर्ण करने का सुझाव है। प्रस्तावित व्यय समय सीमा में हो इसके लिए त्रैमासिक समीक्षा बैठक का सुझाव मान्य किया गया। सभी विभाग समय-सीमा में कार्य करें एवं विलम्ब हेतु जिम्मेदारी तय करें।

7.नये अकादमिक सत्र से नये पाठ्यक्रम आरंभ करने का सुझाव दिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि विगत वर्ष 92 प्रतिशत छात्र संख्या में वृद्धि एवं विश्वविद्यालय में मितव्ययता के परिणामस्वरूप वित्तीय वर्ष 2025-26 में 14.95 करोड़ की बचत हुई है। 

इस अवसर पर कार्यपरिषद् सदस्य प्रो. राकेश बाजपेयी, प्रो. विवेक मिश्रा, चन्द्रशेखर पटेल, डॉ. छाया श्रीवास्तव, संयुक्त संचालक लेखा एवं कोष रोहित सिंह कौशल, संकायाध्यक्ष प्रो. अलका नायक, क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा के प्रतिनिधि डॉ. अजय गुप्ता उपस्थित रहे। कार्यपरिषद् सदस्य प्रो. एस.एस. संधू एवं डॉ. सुनीता सिंह कार्यपरिषद् एवं कोर्ट की बैठकों में गूगल मीट द्वारा ऑनलाईन माध्यम से जुड़े थे।