Jabalpur News: RDVV में अल्प वेतनभोगी कर्मचारियों को लेकर मची खींचतान, वेतन रोके जाने की शिकायत पुलिस तक
आर्य समय संवाददाता,जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (RDVV) में अल्प वेतनभोगी कर्मचारियों को लेकर अचानक माहौल गर्मा गया है। खींचतान इतनी बढ़ गई है कि शिकायतें कलेक्टर और एसपी कार्यालय तक पहुंच गई हैं। दरअसल, अल्प वेतनभोगी कर्मचारी विश्वविद्यालय में चली रही राजनीति के केंद्र में तब आए जब उन्हें कर्मचारी संघ का सदस्य बनाया गया। करीब 73 की संख्या में अल्प वेतनभोगियों के कर्मचारी संघ का सदस्य बन जाने से विश्वविद्यालय प्रशासन के नजदीकी रखने वाले गुट की भौंहे तन गई।
चुंकि वे कुलगुरु के करीबी मानें जाने वाला वीरेंद्र पटेल गुट वर्तमान में संघ के सत्ता से बाहर है,लिहाजा वह नहीं चाहता है कि अल्प वेतनभोगी कर्मचारी संघ के सदस्य बने, उनका ऐसा मानना है कि इसका सीधा लाभ संघ अध्यक्ष संजय यादव को होगा। फिर क्या था आनन-फानन में कर्मचारियों वेतन से हर माह कटने वाली सदस्यता शुल्क की सूची से उक्त कर्मचारियों का नाम अलग कर दिया गया। इतना ही नहीं उक्त कवायद को पूरा करने के लिए बकायदा उनके वेतन भुगतान को रोक दिया गया।
इस मामले में कर्मचारी संघ अध्यक्ष संजय यादव का कहना है कि पूर्व में हाईकोर्ट के निर्देश पर अल्प वेतन भोगी के नाम संघ के सदस्य के तौर पर जोड़े गए हैं। ऐसे में अब विश्वविद्यालय प्रशासन उन पर ऐसा दबाव क्यों बना रहा है कि वे संघ से न जुडे, विश्वविद्यालय प्रशासन किसी व्यक्ति विशेष की राजनीति चमकाने के लिहाज से काम नहीं कर सकता।
इस मामले में जबलपुर कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक को शिकायत सौंप कर्मचारियों का भुगतान जल्द कराए जाने की मांग की गई है। कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि कर्मचारी संघ की सदस्यता ग्रहण करना तथा वेतन भुगतान दो पृथक विषय हैं। संघ के संविधान के अनुसार इस विषय में विश्वविद्यालय की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है, फिर भी उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है।
वेतन न मिलने के कारण वे अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने में असमर्थ हो रहे हैं। साथ ही कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि रविन्द्र बहादुर सिंह द्वारा उनकी अनुमति के बिना वेतन भुगतान का पृथक पत्रक तैयार कर प्रस्तुत किया गया है, जो नियमों के विरुद्ध है। इस संबंध में उन्होंने उक्त नियम विरुद्ध कृत्य पर विधि अनुसार प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। कर्मचारियों ने विश्वविद्यसलय प्रशासन से मांग की है कि प्रति कर्मचारी 10 रुपए की कटौती करते हुए उनका वेतन उनके बैंक खातों में शीघ्र प्रेषित किया जाए। अन्यथा वे न्यायालय की शरण लेने के लिए बाध्य होंगे।
अचानक फाइल बदले जाने से हैरान कर्मचारी - उक्त कर्मचारियों को अप्रैल माह का वेतन भुगतान हेतु सुरक्षा प्रभारी विशाल बन्ने के द्वारा फाइल चलायी गई थी,जिसमें बजट का निर्धारण भी हो गया था। लेकिन उक्त फाइल में प्रति कर्मचारी 10 रूपए कर्मचारी संघ सदस्यता शुल्क काटे जाने का उल्लेख था, लिहाजा उक्त फाइल को गायब कर दिया गया। बताया जाता है कि अचानक स्टोर कीपर के द्वारा नई फाइल चलाई गई। जिसमें कर्मचारियों से सदस्यता शुल्क नहीं लिया जा रहा है। इसी बात का अब विरोध हो रहा है।