Jabalpur News: आशा प्रोत्साहन राशि में घपला करने वालों को बचाने जांच रिपोर्ट पर कुंडली मारकर बैठे अधिकारी, अब एसीएस हेल्थ ने कलेक्टर को सौंपा जिम्मा
आर्य समय संवाददाता, जबलपुर। जिले के स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से एक खेल चल रहा है। यहां संगठित तौर पर पहले शासकीय योजनों में वित्तीय अनियमितता की जाती है। फिर उन्हीं अधिकारियों को जांच सौंप दी जाती है, जो सीधे तौर पर मामले में संलिप्त होते हैं। नतीजा जांच रिपोर्ट कभी फाइलों से बाहर ही नहीं आती है। जांच प्रतिवेदनों पर कुंडली मारकर बैठे अधिकारी मुख्यालय के पत्रों व निर्देशों का भी पालन नहीं करते हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि विभाग में भ्रष्ट अधिकारियों की पैंठ कितनी मजबूज हो चली है।
उदाहरण के तौर पर 2022 में आशा प्रोत्साहन राशि के वितरण में व्यापक गड़बड़ी सामने आयी थी। जिम्मेदार अधिकारियों ने कुछ आशा कार्यकर्ताओं के खाते में 45-45 हजार रूपए तक डाल दिए थे। लेकिन हद तो तब हो गई जब मृत आशा कार्यकर्ता के खाते में भी राशि डाल दी गई। मामला खुला तो फिर शुरू हुआ जांच का खेल। विभाग ने तत्काल एक जांच कमेटी बनाई और दोषियों की तलाश शुरू कर दी।
इस बात की सूचना बकायदा विभाग मुख्यालय को भी भेज दी गई। इसके बाद रस्म अदायागी के लिए बयान हुए, कुछ को नोटिस दिए गए। मगर इसमें भी केवल छोटी मछली ही सामने आयी। लेकिन आपको जानकर आश्र्चय होगा कि तीन साल से ज्यादा समय बीतने को है जांच प्रतिवेदन फाइलों से बाहर नहीं आ सका है।
आशा प्रोत्साहन राशि वितरण अनियमितता के मामले में कई बड़े अधिकारी लपेट में आ रहे थे, खासतौर पर वे जिनकी आईडी से पोर्टल में डाटा चढ़ता था और भुगतान होता था। बस फिर क्या था स्थानीय स्तर पर चल रही जांच की फाइलें लापता गंज भेज दी गई। चूंकि राशि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत आयी थी, लिहाजा मिशन संचालक एनएचएम द्वारा लगातार अनियमितता की जांच एवं दोषियों पर कार्यवाही संबंधी प्रतिवेदन मांग रहा है। सूत्रों की मानें तो एनएचएम से करीब एक दर्जन से ज्यादा पत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन स्थानीय अधिकारी जबाव देने से बच रहे हैं।
विधानसभा में उठा मामला, फिर भी चुप्पी--
मामला कितना गंभीर है और इसमें कितने अधिकारी लपेटे में आएंगे इस बात का अंदाजा यूं लगाए कि विधानसभा में प्रश्न उठने के बाद भी जांच प्रतिवेदन मुख्यालय नहीं भेजा गया। जिसके बाद से भोपाल स्तर के अधिकारी काफी नाराज हैं, वहीं स्थानीय अधिकारी मामला पुराना होने की बात कह पल्ला झाड़ लेते हैं। हालही में संजीवनी क्लीनिकों के लिए आए 58 लाख रूपए के मामले में देखा जा सकता है कि एनएचएम के पत्र का जबाव देने से जिले के अधिकारी कतरा रहे हैं।
अब एसीएस ने खुद लिया संझान--
जांच प्रतिवेदन नहीं प्रस्तुत किए जाने के मामले को अपर मुख्य सचिव (एसीएस) अशोक बर्णवाल ने गंभीर लापरवाही मानी है, सूत्र बतातें हैं कि हालही में विक्टोरिया में निर्माणाधीन भवन के निरीक्षण के दौरान भी वे जिम्मेदार अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश देते नजर आए। वहीं उन्होने ने अब जबलपुर कलेक्टर को इस मामले में पड़ताल कर जांच प्रतिवेदन भिजने की बात कही हैं। पूरे प्रकरण में कलेक्टर राघवेंद्र सिंह की इंट्री होते ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की धड़कने बढ़ गई है। कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने बताया कि इस मामले में मुझे रिमांइडर पत्र मिला है। पत्र के आधार पर आगे की कार्यवाही की जा रही है।