आर्य समय संवाददाता, जबलपुर। करवा चौथ का त्योहार पति-पत्नी के अटूट रिश्ते, प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर सुहागिनें अपने पति की लंबी उम्र और अच्छी सेहत के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। लेकिन जबलपुर की रश्मि गुप्ता ने इस परंपरा को एक नए और मिसाल कायम करने वाले रूप में प्रस्तुत किया है। उन्होंने इस करवा चौथ पर अपने पति दीपक गुप्ता की लंबी उम्र की सिर्फ प्रार्थना ही नहीं की, बल्कि उन्हें अपनी किडनी दान देकर एक नई जिंदगी का अनमोल उपहार दिया।

लंबे समय से गंभीर बीमारी से पीड़ित थे पति
जबलपुर के शांतिनगर निवासी दीपक गुप्ता काफी समय से किडनी की गंभीर बीमारी (रीनल फेलर) से जूझ रहे थे। समय के साथ उनकी स्थिति बेहद चिंताजनक होती जा रही थी। ऐसे कठिन और चुनौतीपूर्ण समय में उनकी पत्नी रश्मि गुप्ता ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी किडनी दान करने का साहसिक निर्णय लिया। रश्मि के इस फैसले ने न केवल उनके परिवार में उम्मीद का नया सवेरा फैलाया, बल्कि समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता की एक नई मिसाल भी पेश की।

मेट्रो प्राइम हॉस्पिटल की विशेषज्ञ टीम को मिली सफलता
यह जटिल किडनी प्रत्यारोपण (Kidney Transplant) जबलपुर स्थित मेट्रो प्राइम हॉस्पिटल की नेफ्रोलॉजी एवं ट्रांसप्लांट यूनिट द्वारा सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।

सर्जरी में प्रमुख भूमिका निभाने वाले विशेषज्ञ:

डॉ. राजेश पटेल (कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट)

डॉ. विशाल वडेरा (नेफ्रोलॉजिस्ट एवं ट्रांसप्लांट सर्जन)

अस्पताल की अनुभवी मेडिकल एवं नर्सिंग सपोर्ट टीम

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, ट्रांसप्लांट के बाद रश्मि गुप्ता और उनके पति दीपक गुप्ता दोनों पूरी तरह से स्वस्थ हैं और रिकवर कर रहे हैं।

अस्पताल में 30 से अधिक ट्रांसप्लांट सफल
मेट्रो प्राइम हॉस्पिटल के डायरेक्टर राजीव बडेरिया ने बताया, "अस्पताल में अब तक 30 से अधिक किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं। हमारी अनुभवी टीम और आधुनिक संसाधनों के समन्वित प्रयासों से मरीजों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का उपचार देने का प्रयास निरंतर जारी है।"

उन्होंने आगे कहा कि रश्मि गुप्ता का यह कदम समाज के लिए एक प्रेरणा है। किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए उपयुक्त स्थिति में ट्रांसप्लांट ही जीवन की गुणवत्ता सुधारने का सबसे बेहतर और सटीक विकल्प है।

प्रेम, विश्वास और त्याग की अनूठी मिसाल
करवा चौथ का पर्व जहाँ अक्सर पूजा-पाठ और व्रत तक सीमित रहता है, वहीं रश्मि गुप्ता और दीपक गुप्ता की यह कहानी इस त्योहार को एक गहरा भावनात्मक और व्यावहारिक अर्थ देती है। इस करवा चौथ पर रश्मि द्वारा दी गई जीवन की यह बख्शीश सिर्फ एक अंगदान नहीं, बल्कि सच्चे प्रेम और समर्पण का जीवंत उदाहरण है।