महिला जज ज्योत्सना राय ने न्याय ना मिलने पर अपने ही सरकारी आवास में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली

28 साल की सिविल जज ज्योत्सना जूनियर डिवीजन के पद पर तैनात थी। उनका शव कमरे में पंखे से लटकता हुआ पाया गया। जज के कोर्ट ना पहुंचने पर जब साथी जज ने पुलिस को सूचना दी और टीम ने मौके पर पहुंचकर घर का दरवाजा खोला तब मामले की जानकारी लगी।

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By aryasamay
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महिला जज ज्योत्सना राय ने न्याय ना मिलने पर अपने ही सरकारी आवास में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली

एक और जहां देश महिलाओं को आगे बढ़ाने, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और उनके पुरुषों से भी आगे निकल जाने की बातें कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसी तस्वीर सामने आती है जो इन सारी बातों को ठेंगा दिखाती नजर आती है। ऐसा ही एक मामला हाल ही में उत्तर प्रदेश के बदायूं से सामने आया है। यहां पर एक महिला जज ज्योत्सना राय ने न्याय ना मिलने पर अपने ही सरकारी आवास में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

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बता दें कि कुछ महीनों पहले इस होनहार बेटी ने सिस्टम से न्याय की गुहार लगाई थी। लेकिन ये खुद ही सिस्टम की भेंट चढ़ गई। शारीरिक शोषण से परेशान इस बेटी ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई न होने के चलते CJI को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु मांगी थी। इसका भी सिस्टम पर असर नहीं हुआ तो इस बेटी ने गले में फांसी का फंदा लगाना ज्यादा बेहतर समझा।

 

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28 साल की सिविल जज ज्योत्सना जूनियर डिवीजन के पद पर तैनात थी। उनका शव कमरे में पंखे से लटकता हुआ पाया गया। जज के कोर्ट ना पहुंचने पर जब साथी जज ने पुलिस को सूचना दी और टीम ने मौके पर पहुंचकर घर का दरवाजा खोला तब मामले की जानकारी लगी।

 

 

फंदे से लटकती हुई जज के कमरे से एक सुसाइड नोट भी मिला है। सुसाइड नोट में जो बातें लिखी है वह परिवार के गले नहीं उतर रही है। सुसाइड नोट उन्होंने लिखा है या नहीं यह पता करने के लिए उनके पेशकार को मौके पर बुलाया गया था। उसने राइटिंग और साइन जज के ही होने की बात कही है। जांच के लिए सुसाइड नोट फॉरेंसिक लैब भेजा गया है।

 

 

इस सिविल जज ने सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी थी। इस पत्र में कहा गया था कि कई बार उनका शारीरिक शोषण हुआ है और वह मानसिक पीड़ा से गुजर रही हैं। जज ने लिखा था कि मुझे आम आदमी को न्याय दिलाना था लेकिन मैं नहीं जानती थी कि मुझे ही किसी भिखारी की तरह इंसाफ मांगना पड़ेगा। नौकरी के दौरान कई बार मेरा शोषण किया गया और मैं किसी अवांछित कीड़े की तरह खुद को महसूस करती हूं। मैं भारत की सभी कामकाजी महिलाओं से कहना चाहूंगी कि वह सेक्सुअल हैरेसमेंट के साथ जीना सीख जाएं।

 

पत्र में यह भी लिखा था कि मेरा आत्मसम्मान, मेरी जिंदगी और मेरी आत्मा पूरी तरह से मर चुकी है। मैं खुद निराश हो चुकी हूं, तो मैं लोगों को न्याय कैसे दे पाऊंगी। मैं डेढ़ साल से जिंदा लाश की तरह रह रही हूं और अब मेरी जिंदगी का कोई मकसद नहीं बचा है। मेरे पास सुसाइड के अलावा कोई ऑप्शन नहीं है इसलिए मुझे इच्छा मृत्यु की इजाजत दी जाए। ये पत्र सामने आने के बाद हर तरफ सनसनी फैल गई थी।

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