मोहन सरकार का AI प्लान तैयार ,न केवल अवैध उत्खनन पर शिकंजा कर सकेगी बल्कि राजस्व में हो रही भारी हानि को भी रोकने में लाभकारी साबित होगा

Mohan government's AI plan is ready, it will not only be able to crack down on illegal mining but will also prove beneficial in preventing huge loss in revenue.

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सीएम मोहन यादव

मध्य प्रदेश पिछले कई सालों से अवैध उत्खनन की परेशानी झेल रहा है और सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात इस विषय में है वह यह है कि इससे न केवल प्राकृतिक संपदा, सरकार के राजस्व बल्कि कई अधिकारियों की जान को भी नुकसान पहुंचा है। अभी हाल ही में शहडोल में पटवारी की मौत इस बात का ताजा उदाहरण


प्रदेश में अवैध उत्खनन रोकने के लिए मोहन सरकार का AI प्लान तैयार हो रहा है। इससे सरकार न केवल अवैध उत्खनन पर शिकंजा कर सकेगी बल्कि राजस्व में हो रही भारी हानि को भी रोक सकेगी।

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मध्य प्रदेश पिछले कई सालों से अवैध उत्खनन की परेशानी झेल रहा है और सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात इस विषय में है वह यह है कि इससे न केवल प्राकृतिक संपदा, सरकार के राजस्व बल्कि कई अधिकारियों की जान को भी नुकसान पहुंचा है। अभी हाल ही में शहडोल में पटवारी की मौत इस बात का ताजा उदाहरण है।

रखकर मध्य प्रदेश सरकार लगभग 30 करोड रुपए खर्च कर AI के जरिए अवैध उत्खनन पर लगाम लगाने की तैयारी कर रही है। इसको लेकर ऐसा रहेगा सरकार का प्लान।

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बात करें अवैध खनन और अवैध उत्खनन की तो ग्वालियर चंबल क्षेत्र इस परेशानी से सबसे ज्यादा प्रभावित नजर आता है। चाहे बात करें रेत की अवैध उत्खनन परिवहन की, पत्थर के अवैध उत्खनन परिवहन या किसी अन्य चीज़ के अवैध उत्खनन परिवहन की, यह क्षेत्र सभी में नंबर एक पर आता।

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बात करते हैं डबरा क्षेत्र की जहां सिंह और पार्वती नदी से बड़े स्तर पर रेत का अवैध उत्खनन जोरों शोरों पर चल रहा है और सबसे अचरज की बात यह है कि इस बात की जानकारी जिले के सभी आला अधिकारियों को है। फर्जी रॉयल्टी काटकर फर्जी तरीके से रेत का अवैध उत्खनन न केवल राजस्व विभाग के खजाने को भारी नुकसान पहुंचा रहा है बल्कि आमजन को भी अपने सपनों का घर बनाने के लिए भारी मात्रा में पैसा चुकाना पड़ता है। डबरा और इसके आसपास रेट की ट्राली की कीमत 10 से 12 हज़ार रुपए की है।

एक घाट की रॉयल्टी देकर कंपनी पूरे क्षेत्र के घाटों से अवैध उत्खनन कर रही है उसे पर बाकायदा रॉयल्टी ले रही है लेकिन इसके बावजूद उत्खनन पूरी तरह अवैध है क्योंकि कंपनी ही अवैध है। सोचने वाली बात यह भी है की इन सब बातों की जानकारी जिला कलेक्टर को होते हुए भी अब तक यहां रेत उत्खनन के लिए ठेका नहीं निकाला गया है।


इसी तरह बिलौआ से ग्वालियर के बीच गिट्टी और डस्ट से भरे ओवरलोड ट्रॉलों को देखा जा सकता है। गौर करने वाली बात यहां भी यह है कि यह ट्रॉली न केवल आरटीओ चेक पोस्ट के सामने से गुजरते हैं बल्कि टोल से भी गुजरते हैं लेकिन बावजूद इसके अधिकारियों द्वारा ओवरलोडिंग पर किसी भी तरह की लगाम नहीं लगाई जाती है। मुरैना, धौलपुर में भी पत्थर, मुरम और रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन जोरों शोरों से चल रहा है। प्रशासन द्वारा कार्यवाही न ही इसपर लगाम लगा पा रही है ना ही माफियाओं को रोक पा रही है।

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