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Jabalpur News : अब 19 अप्रेल के बाद ही होंगे विश्वविद्यालय की परीक्षाएं टीचर्स से लेकर कर्मचारियों तक की लगी चुनाव ड्यूटी,खाली हुआ आरडीवीवी

लोकसभा चुनावों के मद्देनजर अब रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (आरडीवीवी) प्रशासन को भी अपने शैक्षेणिक कलैंडर में बदलाव करना पड रहा है।

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आर्य समय संवाददाता,जबलपुर। लोकसभा चुनावों के मद्देनजर अब रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (आरडीवीवी) प्रशासन को भी अपने शैक्षेणिक कलैंडर में बदलाव करना पड रहा है। जिसके चलते 1 अप्रैल से प्रस्तावित की गई तमाम परीक्षाओं को अब 19 अप्रैल के बाद की तिथियों में कराने की तैयारी चल रही है।

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सबसे मजे की बात तो यह कि विश्वविद्यालय के दैनिक गतिविधियों के लिए आवश्यक स्टॉफ भी नहीं बचा है। करीब - करीब 80 फीसदी से ज्यादा कर्मचारियों-अधिकारियों की चुनाव ड्यूटी लग गई है। जिसका असर यह है कि डिग्री, मार्कसीट,माइग्रेशन जैसे काम भी ठप हो गए हैं। जिसके चलते दूर दराज से आने वाले छात्रों को पूरे दिन भटकने के बाद भी निराश होकर लौटना पड़ता है।


दरअसल, आरडीवीवी के शैक्षेणिक कलैंडर के हिसाब से 1 अप्रैल से फाइनल ईयर के एग्जाम आयोजित किए जाने थे। जिसको लेकर व्यापक तैयारियां भी की गई थी। लेकिन चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद जबलपुर लोकसभा सीट पर 19 अप्रैल को मतदान की तिथि सामने आयी। अब चुनाव कार्यो में विश्वविद्यालय के सभी 30 नियमित शिक्षकों को जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा बुला लिया गया है।

कुछ शिक्षकों को तो चुनाव आचार संहिता लगते ही अलग - अलग कमेटियों का मुखिया बनाकर बैठा दिया गया है। वहीं 100 से ज्यादा कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी लगाई गई है। जिसमें से करीब 30 तृतीय श्रेणी कर्मचारियों को तो पूर्व में ही अलग-अलग कार्यो में संलग्न कर लिया गया था। वहीं अब 70 से ज्यादा कर्मचारियों की बीएलओ ड्यूटी के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बात साफ है विश्वविद्यालय के प्रमुख विभागों में ना तो विभाग प्रमुख बचे हैं और ना ही लिपिक। इसी तरह करीब 250 से ज्यादा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की चुनाव ड्यूटी पर तैनाती की जानी है। उनका भी बुलावा जल्द आने वाला है। यही कारण है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षाओं को आगे बढ़ाना ही उचित समझा है।


एग्जाम सेंटर का भी संकट -
विश्वविद्यालय में स्टॉफ की कमी ही एक मात्र कारण नही है परीक्षाओं को आगे बढ़ाने में। विश्वविद्यालय के सामने एग्जाम सेंटर को लेकर भी संकट खड़ा हो गया है। दरअसल, कॉलेजों के शिक्षकों को भी चुनाव ड्यूटी में लगाया गया है। जिसके चलते एग्जाम कराने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा विश्वविद्यालय प्रशासन।

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