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Jabalpur News: RDVV एकेडमिक स्टाफ काॅलेज की पूर्व डिप्टी डायरेक्टर को बड़ा झटका, कुलाधिपति कार्यालय से भी खारिज हुआ दावा

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (RDVV) के एकेडमिक स्टॉफ कॉलेज (एचआरडीसी) के डिप्टी डायरेक्टर के पद से सेवानिवृति हुई डॉ. राजेश्वरी राणा को बड़ा झटका लगा है।

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Jabalpur RDVV दीक्षांत रिहर्सल 3 अक्टूबर से, 25 सितंबर से पंजीयन 

Big shock to former Deputy Director of RDVV

आर्य समय संवाददाता, जबलपुर। उनकी अपील को कुलाधिपति (राज्यपाल) कार्यालय ने भी खारिज कर दिया है। कुलाधिपति कार्यालय ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय व डॉ. राणा का पक्ष सुनने के बाद यह निर्णय लिया है। दरअसल, डिप्टी डायरेक्टर रहीं डॉ. राणा को आपत्ति थी कि उन्हें 62 वर्ष की आयु में विश्वविद्यालय प्रशासन ने सेवानिवृत्त कर दिया।

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उनका दावा था कि उनका पद शिक्षकीय था और इस लिहाजा से उन्हें 65 वर्ष की आयु पूरा कर लेने के बाद ही सेवानिवृत्त किया जाना चाहिए था। लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऐसा नही किया और अगस्त 2022 में उन्हें सेवानिवृत्त कर दिया गया।

कुलाधिपति कार्यालय ने डॉ. राणा की अपील को बड़ी गंभीरता से लेते हुए RDVV के कुलपति, कुलसचिव सहित अन्य संबंधित विभागों के प्रमुखों को तलब करते हुए जबाव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। सुनवाई के दौरान कुलाधिपति कार्यालय ने डॉ. राणा द्वारा प्रस्तुत किए गए दावों पर बिंदुवार जबाव मांगा था। 

बताया जाता है कि तत्कालीन कुलपति कपिल देव मिश्र सहित अन्य सभी अधिकारियों ने कुलाधिपति कार्यालय में खुद प्रस्तुत होकर अपने बयानों को लिपिबद्ध कराया था।

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जो विषय स्वीकृत नहीं था उसमें शिक्षक कैसे पदस्थ होगा-
सूत्रों की मानें तो तत्कालीन कुलपति ने स्पष्ट किया था कि डॉ. राजेश्वरी राणा द्वारा जो शिक्षकीय पद पर चयन होने के बात कही जा रही है वह विषय स्वीकृत ही नहीं है। डॉ. राजेश्वरी राणा का कार्य व उसकी प्रकृति शिक्षकीय कार्य से भिन्न है। बताया जाता है कि डॉ. राजेश्वरी राणा के द्वारा ऐसा कोई तथ्य दस्तावेजों के माध्यम से प्रस्तुत नहीं किया जा सका जो यह दर्शित करता हो कि उनका मामला शासकीय शिक्षक की श्रेणी में आता हो और न ही यह तथ्य प्रस्तुत किया गया है कि उनके द्वारा अपने कार्यकाल के दौरान कम से कम 20 वर्ष तक अध्यापन कार्य किया गया हो।

प्रो. कमलेश मिश्रा प्रकरण का भी दिया हवाला -
बताया जाता है कि डॉ. राणा ने एकेडमिक स्टॉफ कॉलेज के डॉयरेक्टर रहे डॉ. कमलेश मिश्रा को 65 वर्ष आयु पूर्ण करने पर सेवानिवृत्त किए जाने का हवाला भी अपने आवेदन में दिया था। जिसके जबाव में विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया था कि प्रोफेसर कमलेश मिश्रा की भी प्रथम नियुक्ति सहयक प्राध्यापक के पद पर हुई थी, ना कि सहायक डायरेक्टर एकेडमिक स्टॉफ कॉलेज।

ऐसी स्थिति में डॉ. राजेश्वरी राणा का मामला कमलेश मिश्रा के मामले के अनुरूप हो यह नही पाया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने जबाव में यह भी कुलाधिपति कार्यालय को बताया था कि  डॉ. राजेश्वरी राणा की प्रथम नियुक्ति सहायक संचालक एकेडेमिक स्टाफ कॉलेज रानी दुगवती विश्वविद्यालय जबलपुर पर सन् 2000 हुई थी। यह नियुक्ति मप्र विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 की धारा 49 (2) में निर्धारित चयन समिति के माध्यम से अशैक्षणिक पद पर हुई थी।

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