Jabalpur News: जबलपुर सहित देश के 56 केंट बोर्ड एक साल और रहेंगे भंग

रक्षा मंत्रालय ने जबलपुर सहित देश 56 केंट बोर्ड को भंग रखे जाने की समय सीमा को एक साल के लिए बढ़ा दिया है। हालही में इस आशय की अधिसूचना रक्षा मंत्रालय ने जारी कर दी है।

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: Cantt Board increased license fees

56 cantt boards of the country including Jabalpur

आर्य समय संवाददाता,जबलपुर। बात साफ है कि रक्षा मंत्रालय केंट बोर्ड में मेंबर चुनाव के पक्ष में नहीं है। दरअसल, जबलपुर केंट बोर्ड सहित देश के 56 बोर्ड में पिछले 4 सालों से मेंबर के चुनाव नहीं कराए गए हैं। अंतिम निर्वाचित केंट बोर्ड मेंबर्स का कार्यकाल 10 फरवरी 2020 को समाप्त हुआ था। जिसके बाद से लगातार रक्षा मंत्रालय केंट एक्ट के प्रावधानों का हवाला देते हुए बोर्ड को भंग की स्थिति में रखे हुए है।

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रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना 11 फरवरी 2024 से अगले एक साल के लिए प्रभावी रहेगी। इस दौरान अगर निर्वाचित मेंबर्स का चुनाव हुआ तो ठीक नहीं तो बोर्ड भंग ही रहेगी। हालाकी जानकारों का कहना है कि केंट के सिविल एरिया का निकायों में विलय किया जा रहा है। वर्तमान में करीब 26 केंट बोर्ड के प्रकरण प्रक्रिया में है। शेष के भी विलय की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से लोकसभा चुनाव बाद प्रारंभ हो जाएगी। मध्यप्रदेश के मुरार और सागर केंट की तो फाइनल रिपोर्ट भी जमा हो चुकी है। किसी भी दिन विलय की अधिसूचना जारी हो सकती है। इस बात के संकेत खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के द्वारा राज्य शासन को भेजे गए पत्रों में मिलते है।

इधर,पूर्व बोर्ड मेंबर चुनाव कराने की मांग को लेकर कोर्ट की शरण में -
एक तरफ केंट बोर्ड के सिविल एरिया को विलय करने रक्षा मंत्रालय काफी रफ्तार से काम कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में पूर्व मेंबर अमरचंद बावरिया ने चुनाव कराए जाने की मांग को लेकर याचिका दाखिल कर रखी है। ऐसा बताया जा रहा है कि याचिका फायनल हियरिंग पर है। याचिका कर्ता अमरचंद बावरिया का कहना है कि 2019 में निर्वाचित मेंबर्स का कार्यकाल पूरा हो गया था, उसके बाद उन्हें एक साल का एक्सटेंशन दिया गया था। इस हिसाब से 10 फरवरी 2020 से केंट बोर्ड में कोई भी निर्वाचित मेंबर नहीं है।

वहीं केंट एक्ट के तहत नामित मेंबर नियुक्त करने की व्यवस्था है,लेकिन बीते चार सालों में उसे भी नियुक्त नहीं किया गया। पूर्व मेंबर ने आरोप लगाते हुए कहां कि केंट बोर्ड कार्यालय में नागरिकों की समस्याओं पर अब ध्यान नहीं दिया जाता है,क्योंकि उनका पक्ष रखने वाले मेंबर अब नहीं है। बोर्ड में अधिकारी मनमानी कर रहे हैं।

आम नागरिक तो अब बोर्ड कार्यालय के अंदर तक प्रवेश नहीं कर पाते हैं। इसलिए हमने कोर्ट से मांग की है कि जब तक बोर्ड का सिविल एरिया किसी निकाय में मर्ज नहीं हो जाता तब तक के लिए चुनाव कराए जाएं।

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