Jabalpur News: 1988 में आर्मी बेड़े से बाहर हुई 3 हजार राइफल में आयी नई जान ,सीओडी जबलपुर ने पुलिस उत्तराखंड को दिए

1988 में आर्मी के बेडे से बाहर हुई 7.62 एमएम सेल्फ लोडेड राइफल (एसएलआर) से अब उत्तराखंड पुलिस पहरेदारी करेगी। दरअसल, 30 वर्षों से भी अधिक समय तक भारतीय सेना का प्राथमिक हथियार में एस एल आर शामिल था।

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3 thousand rifles taken out of the army fleet

3 thousand rifles taken out of the army fleet

आर्य समय संवाददाता,जबलपुर। सन 1988 में इसे 5.56 एम एम इंसास राइफल द्वारा बदल दिया गया। जिसके बाद सेंट्रल आर्डिनेंस डिपो में काफी बड़ी संख्या में एस एल आर राइफल रखी हुई थी। चुंकि एसएलआर के डिजाइन और मारक क्षमता की विशेषता के कारण अभी भी इसकी उपयोगिता बरकरार है। लिहाजा राज्य पुलिस में इसकी डिमांड बनी हुई है। इस बात को ध्यान में रखते हुए सीओडी प्रशासन ने आर्मी बेडे से बाहर हुई राइफलों में नई जान डालते हुए उसे उत्तराखंड पुलिस को सौंपा हैं।

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3 thousand rifles taken out of the army fleet

भारतीय सेना की सराहनीय पहल 
ब्रिगेडियर वसंत कुमार, कमांडेंट सेंट्रल ऑर्डिनेंस डिपो, जबलपुर और ऑर्डनेंस डिपो जबलपुर के सभी कर्मचारियों ने 'राष्ट्र प्रथम' के लोकाचार को ध्यान में रखकर प्रभावी समाधान प्रदान करते हुए, उत्तराखंड पुलिस बल को तीन हजार 7.62 एम एम सेल्फ लोडेड राइफल (एसएलआर) को सौंपकर राज्य के सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए नवीनीकरण का अथक प्रयास किया है।

पुलिस की बढ़ेगी ताकत -
भारतीय सेना की इस सराहनीय पहल का उत्तराखंड पुलिस द्वारा स्वागत किया गया, जिससे विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण इलाकों और स्थितियों में उनकी परिचालन क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।  यह संयुक्त प्रयास भारतीय सेना और सिविल प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल को प्रदर्शित करता है, जो की राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है I 

सेंट्रल आर्डिनेंस डिपो, जबलपुर ने उत्तराखंड के अग्रिम पंक्ति के रक्षकों को मजबूत करने के लिए अप्रचलित सैन्य सम्पतियों का पुनः उपयोग करके एक उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत व स्थापित किया है I

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