Jabalpur News: कैंट बोर्ड ने खडे़ किए हाथ, अब एक टाइम ही होगी वॉटर सप्लाई, गाड़ियां धोने पर लगी रोक
आर्य समय संवाददाता,जबलपुर। भीषण गर्मी के साथ प्राकृतिक जल स्त्रोत सूखते जा रहे हैं, वहीं भूमिगत जल स्तर लगातार नीचे गिरते जा रहा है। नतीजतन शहर में पेयजल आपूर्ति एक बड़ी समयस्या बनकर उभरी है। नगर निगम सीमा अंतर्गत आने वाले रांझी जल शोधन संयत्र से तीन जून से एक टाइम वॉटर सप्लाई की जाए रही है।
वहीं अब कैंट बोर्ड के प्रबंधन में आने वाले क्षेत्रों में भी एक समय ही पेयजल आपूर्ति होगी। कैंट बोर्ड ने इसके पीछे भूमिगत जल स्तर के नीचे जाने को मुख्य वजह बताया है। कैंट बोर्ड कार्यालय से जारी सूचना में स्पष्ट किया गया है कि 10 जून से पूरे कैंट क्षेत्र में केवल सुबह पानी की आपूर्ति की जाएगी।
ताकि आमजन अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए पानी को एकत्र कर सकें। सीईओ राजीव कुमार ने कैंट वासियों से अपील की है कि भूमिगत जल के लगातार गिरते स्तर को बचानें एवं पानी की आपूर्ति पूरी करने के लिए पानी का दुरूपयोग बंद करें।
वाहनों की धुलाई पर रोक, उल्लंघन पर कटेगा कनेक्शन -
साथ ही साथ कैंट क्षेत्र में वाहनों की धुलाई का कार्य कर रहे समस्त दुकानदारों, गाडी मैकेनिकों आदि को आदेशित किया जाता है कि आगामी आदेश तक गाडियों की धुलाई का कार्य पूर्ण रूप से बंद रखेंगे। ऐसा न करनें पर उनके विरूध जुर्माना वसूलने के साथ-साथ कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
साथ ही साथ पानी का दुरूपयोग करनें के कारण नल कनेक्शन-बोरिंग आदि की जब्ती की जाएगी। जिसकी समस्त जिम्मेदारी आप स्वयं की होगीं। कैंट बोर्ड प्रशासन का यह आदेश पूरे कैंट क्षेत्र के समस्त रहवासियों/ व्यापारियों के लिए आगामी मानसून आने तक प्रभावी रहेगा।
रहवासी क्षेत्रों में टेंकर से सप्लाई -
कैंट बोर्ड द्वारा कटंगा और उससे लगे पहाड़ी क्षेत्रों में टैंकर के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जा रही है। एपीआर कालोनी के प्रणव अवस्थी ने बताया कि पूरे क्षेत्र का जलस्तर गिर गया है। निजी बोरवेल भी दस मिनट से ज्यादा पानी नहीं दे पा रहे हैं।
नर्मदा जल का सपना कब होगा पूरा -
पेयजल संकट गहराने के साथ ही कैंट वासियों का कहना है कि नर्मदा किनारे होने के बाद भी बूंदबूंद पानी को तरस रहे हैं। पूर्व बोर्ड मेंबर अमरचंद बावरिया ने कहा कि नर्मदा जल कैंट तक पहुंचाने को लेकर कई बार सपने दिखाए गए। हालही में अमृत 0.2 के तहत आपूर्ति का दावा किया गया,लेकिन जमीनी हकीकत सबके सामने है। कैंट वासियों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है।