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Jabalpur News : 10 करोड़ के मानहानि मामले में राहत पाने पूर्व सीएम शिवराज पहुंचे एमपी हाईकोर्ट, फैसला सुरक्षित

विशेष एमपी- एमएलए कोर्ट जबलपुर में लंबित 10 करोड़ की मानहानि के मामले में सुनवाई के ठीक एक दिन पहले मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान,भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा हाईकोर्ट पहुंचे हैं।

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By Shivansh Shukla
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Jabalpur Highcourt News: भोपाल नगर निगम के वार्ड आरक्षण को चुनौती खारिज

MP High Court

जबलपुर।  पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा याचिका दाखिल करते हुए एमपी- एमएलए कोर्ट में विचाराधीन प्रकरण को खारिज किए जाने की मांग की गई है। याचिका पर पूर्व मुख्यमंत्री की ओर से हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता आरएन सिंह ने पक्ष रखा। वहीं विवेक तन्खा की ओर से उनके अधिवक्ताओं ने भी अपनी प्राथमिक आपत्ति दर्ज कराई। उनका कहना था कि पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा दाखिल की गई याचिका की प्रति उन्हें प्राप्त नहीं हुई है। सुनवाई के उपरांत जस्टिस संजय द्विवेदी की कोर्ट ने याचिका पर फैसला सुरक्षित कर दिया है।
 उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग के 27 प्रतिशत आरक्षण को रद्द किए जाने के आदेश के बाद बीजेपी नेताओं ने अधिवक्ता एवं कांग्रेस नेता विवेक तंखा को ओबीसी विरोधी नेता बताया था। दरअसल,साल 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत चुनाव में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पर रोक लगा दी थी। इस दौरान विवेक तंखा ने याचिकाकर्ताओ की ओर से पंचायत और निकाय चुनाव में रोटेशन और परिसीमन को लेकर पैरवी की थी। उस वक्त बीजेपी नेताओं की तमाम बयानबाजी के बीच राज्यसभा सांसद विवेक तंखा ने भी अपनी सफाई देते हुए बयान जारी किया था। इसके बाद विवेक तंखा द्वारा मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और तत्कालीन मंत्री भूपेंद्र सिंह को नोटिस भेजकर उनकी मानहानि करने का आरोप लगाया और साथ ही उनसे माफी मांगने को कहा। कानूनी नोटिस के बावजूद जब बीजेपी के तीनों नेताओं ने माफी नहीं मांगी तो उनके खिलाफ 10 करोड़ की मानहानि का मुकदमा दायर किया गया।
यहां यह भी गौरतलब है कि जिला अदालत में गवाही के दौरान विवेक तंखा की ओर से अदालत में बताया गया कि मध्य प्रदेश में निकाय चुनाव के दौरान ओबीसी आरक्षण मामले पर सुनवाई के बाद बीजेपी के नेताओं ने बिना तथ्यों को जाने उनकी मानहानि करते हुए गंभीर आरोप लगाये थे। इससे उनकी छवि पूरे देश में धूमिल हुई थी। विवेक तंखा ने कहा कि मुझे देश में ओबीसी विरोधी बताया गया, जबकि सुप्रीम कोर्ट में उन्होंने जो पिटीशन लगाई थी। उसमें ओबीसी आरक्षण या ओबीसी से संबंधित कोई बात नहीं कही गई थी। तंखा ने कहा कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ ये कहा था कि पंचायत चुनाव संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होना चाहिए।इसके बावजूद बीजेपी के नेताओं ने बिना तथ्यों को जाने उन पर गंभीर आरोप लगाए।

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